माँ नर्मदा जी पुण्य सलिला की गोद में अवस्थित रमणीय स्थली नर्मदापुरम (माखन नगर) में जनभागीदारी परिषद के तत्वावधान में आयोजित आदि गुरु शंकराचार्य जी के जन्म-जयंती पखवाड़ा महोत्सव के अंतर्गत एक गरिमामय एवं आध्यात्मिक वातावरण से परिपूर्ण कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। उक्त अवसर पर मुख्य अतिथि एवं प्रमुख वक्ता परम गौ-भक्त श्री उत्तम गायकवाड ने अपने ओजस्वी उद्बोधन में जगद्गुरु आदि शंकराचार्य जी के दिव्य एवं युगान्तरकारी जीवन पर विशद प्रकाश डाला।
Cheap Website Developer India – CLICK HERE

उन्होंने प्रतिपादित किया कि आदि शंकराचार्य जी ने भारतीय संस्कृति एवं सनातन सभ्यता के पुनर्स्थापन हेतु अभूतपूर्व त्याग, तप एवं परिश्रम का परिचय देते हुए, समस्त भौतिक सुविधाओं के अभाव में भी देश की चारों दिशाओं का पदयात्रा द्वारा परिभ्रमण कर आध्यात्मिक एकता का सूत्रपात किया। उनका जीवन भारतीय एकात्म चेतना का सजीव प्रतीक है।
श्री गायकवाड ने अपने वक्तव्य में यह भी अभिव्यक्त किया कि वर्तमान समय में माँ नर्मदा तथा सूर्यपुत्री ताप्ती मैया के संरक्षण एवं संवर्धन को हमारी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में स्थान मिलना चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वेदलक्षणा गौ माता, जिनमें 33 कोटि देवी-देवताओं का निवास माना गया है, आज अपने अस्तित्व हेतु संघर्षरत हैं। अतः समस्त समाज का यह नैतिक एवं आध्यात्मिक दायित्व है कि गौ माता को पुनः उनका यथोचित सम्मान एवं संरक्षण प्रदान किया जाए।
कार्यक्रम में प्रांत प्रमुख श्री कौशलेश तिवारी जी ने भी अपने सारगर्भित वक्तव्य में जगद्गुरु शंकराचार्य जी के अद्वैत वेदान्त सिद्धांत की गूढ़ता एवं उसके सार्वकालिक महत्व पर प्रकाश डाला।

इस गरिमामयी आयोजन में जिला संयोजक श्री सहगल जी, अध्यक्ष श्री सुरेश अग्रवाल जी, गायत्री परिवार के वरिष्ठ सदस्य श्री खंडेलवाल जी एवं श्री शास्त्री जी, साथ ही श्री चतुर्वेदी जी, श्री साहिल जी सहित अनेक गणमान्य जन उपस्थित रहे, जिनकी सहभागिता ने कार्यक्रम की शोभा एवं महत्ता में अभिवृद्धि की।