बैतूल जिला मुख्यालय से महज 15 किलोमीटर दूर स्थित साईखंडारा (सापना डैम) इन दिनों आस्था और संस्कृति के अनूठे संगम का गवाह बना। आदिवासी समाज के आराध्य मेघनाथ बाबा (खंडेरायी पेन) के पावन सानिध्य में भव्य फागुन मेले का आयोजन किया गया।

इस मेले की सबसे बड़ी खूबसूरती यहाँ का पारंपरिक डंडार नृत्य रहा। ढोल-मांदल की थाप पर जब ग्रामीण अपनी पारंपरिक वेशभूषा में थिरके, तो पूरा वातावरण आदिवासी संस्कृति के रंग में रंग गया। मेले में न केवल साईखंडारा, बल्कि आसपास के दर्जनों गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचे।
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मेले के मुख्य आकर्षण:
- सांस्कृतिक गौरव: युवक-युवतियों और बुजुर्गों का पारंपरिक वेशभूषा में डंडार नृत्य का प्रदर्शन।
- आस्था का केंद्र: मेघनाथ बाबा की विशेष पूजा-अर्चना और सुख-समृद्धि की कामना।
- ग्रामीण हाट-बाजार: मेले में सजी सैकड़ों दुकानों पर जमकर खरीदारी और स्थानीय व्यंजनों का लुत्फ।
यह मेला केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की एकता और उनकी प्राचीन विरासत को जीवंत रखने का एक सशक्त माध्यम है। सापना डैम की वादियों में लगा यह मेला प्रकृति और परंपरा का एक दुर्लभ मेल पेश करता है।

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