बैतूल। हमारी भारतीय संस्कृति की असली पहचान ग्रामीण अंचलों के मेलों और उत्सवों में बसती है। इसी कड़ी में, बैतूल जिला मुख्यालय से महज 15 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम साईखंडारा (सापना डैम) एक बार फिर अपनी गौरवशाली परंपरा का गवाह बनने जा रहा है।
होली के बाद आने वाली चौथस का इंतजार यहाँ के लोगों को साल भर रहता है। प्रतिवर्ष की तरह इस साल भी 7 मार्च 2026, दिन शनिवार को साईखंडारा (मेघनाथ) मेले का भव्य आयोजन होने जा रहा है।

आदिवासी संस्कृति और डंडार नृत्य का आकर्षण
ईमानदारी से कहूँ तो, इस मेले की सबसे खास बात यहाँ की जीवंत संस्कृति है। मेले में पहुँचते ही आपको ऐसा लगेगा जैसे आप वक्त में पीछे चले गए हों। यहाँ आने वाले श्रद्धालु और ग्रामीण अपनी पारंपरिक आदिवासी वेशभूषा में नजर आएंगे, जो मेले की रंगत में चार चाँद लगा देते हैं।
हैरानी की बात यह है कि आज के आधुनिक दौर में भी यहाँ के युवाओं ने अपनी विरासत को सहेज कर रखा है। मेले का मुख्य आकर्षण ‘डंडार नृत्य’ होगा, जहाँ ढोल की थाप पर थिरकते कदम और लोक गीतों की गूंज हर किसी को मंत्रमुग्ध कर देगी।
मेले की रौनक और तैयारियाँ
मेले को लेकर ग्राम साईखंडारा और आसपास के क्षेत्रों में जबरदस्त उत्साह है। प्रशासन और स्थानीय लोगों की मदद से तैयारियाँ जोरों पर हैं।
- दुकानों का अंबार: मेले में बड़ी संख्या में दुकानें सजेंगी, जहाँ मनिहारी के सामान से लेकर पारंपरिक पकवानों का आनंद लिया जा सकेगा।
- भारी जनसैलाब: न केवल साईखंडारा, बल्कि आसपास के दर्जनों गांवों से हजारों की संख्या में लोग यहाँ अपनी श्रद्धा अर्पित करने और अपनों से मिलने पहुँचते हैं।
मेरी राय में: अगर आप बैतूल में हैं या आसपास रहते हैं, तो शनिवार को सापना डैम के पास लगने वाले इस मेले को मिस मत कीजिएगा। यह न सिर्फ मनोरंजन का साधन है, बल्कि हमारी जड़ों से जुड़ने का एक बेहतरीन मौका भी है।
प्रमुख जानकारी एक नजर में:
- दिनांक: 7 मार्च 2026 (शनिवार)
- स्थान: ग्राम साईखंडारा (सापना डैम के पास), जिला बैतूल।
- प्रमुख आकर्षण: मेघनाथ पूजा, पारंपरिक वेशभूषा, डंडार नृत्य।
